रक्षाबंधन क्या है ? | रक्षाबंधन कैसे मनाएं ? | रक्षासूत्र मन्त्र क्या है? | रक्षाबंधन ऐतिहासिक कहानी क्या है। रक्षाबंधन कब है?

इस पोस्ट में कुछ ऐसी जानकारी- रक्षाबंधन क्या है?, रक्षाबंधन कैसे मनाएं?, राखी मन्त्र क्या है?, रक्षाबंधन ऐतिहासिक कहानी क्या है?

रक्षाबंधन हिंदुओं का एक सांस्कृतिक त्यौहार है। यह त्यौहार विश्व-प्रेम और विश्व-शांति की स्थापना के उद्देश्य से पुरातनकाल से मनाया जा रहा है। यह त्यौहार जैन लोग भी मानाते है।  रक्षाबन्धन प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस पर्व पर राखी का अधिक महत्त्व रहता है। राखी कच्चे धागे से बनी एक रंगीन कलावे, रेशमी धागे, की होती है।  तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु की भी राखी बनवाई जाती है। रक्षाबंधन त्यौहार पर लोग नये कपड़े खरीद कर लाते है।  रक्षाबंधन दिन पहनने के लिए। बाजार में तरह-तरह उपहार व रक्षाबंधन बिकते है। इस  त्यौहार पर लोग  सुबह से शाम तक मार्केट जाते है।

 3 August 2020 रक्षाबंधन 

यह त्यौहार  बहन-भाई के रिश्ते का प्रसिद्ध त्यौहार है। इस  त्यौहार  पर सभी भाई अपनी बहन से राखी बधवाते है। इस त्यौहार पर बहने अपने भाइयो की तरक्की के लिए भगवान से प्राथना करती है। इसके अतरिक्त छोटी लड़कियाँ अपने पिता और  नेता या प्रतिष्ठित लोगों को राखी  बँधती है।  इस त्यौहार पर  मेहमानों का आना जाना लगा रहता है। इस त्यौहार  पर सभी भाई अपनी बहन को उपहार, वा धन (रुपया ) देते है। रक्षाबंधन का  त्यौहार भाई बहन के प्यार को मजबूत बनाता है।  इस त्यौहार  पर सभी परिवार के सदस्यो में एकता का लहर आ जाता है। रक्षाबंधन  धूम-धाम से मनाया जाता है। 

रक्षाबंधन : कैसे मनाएं पर्व, संपूर्ण विधि ...

रक्षाबंधन के दिन सभी लड़कियां और महिलाएं प्रातः काल स्नान करके , एक  थाली में राखी के साथ रोली, चावल, हल्दी, दीपक  और मिठाई  को रखती हैं।  पुरुष लोग भी प्रातः काल स्नान करके नए वस्त्र  पहन कर।  साफ जगह पर बैठते है। रक्षाबंधन के दिन सभी भाई-बहन मिलकर  पहले अपने अभीष्ट देवता की पूजा करते हैं।  इसके बाद बहनें  रोली और हल्दी से अपने भाई को टीका लगाकर उस पर  चावल भी लगाती है।  और उनके सर पर चावल छिड़का जाता है।  भाई की आरती उतारकर दाहिने हाथ में राखी बांधी जाती है।  राखी बांधने  के उपरांत भाई अपनी बहन को कुछ उपहार या धन देते हैं। तथा बहन वचन लेती है, अपने भाई से अपनी रक्षा करने की।  इस प्रकार रक्षाबंधन का अनुष्ठान पूरा करने के बाद भोजन करते हैं।  इस त्यौहार पर सभी बहनें अपने भाई के लिए विशेष प्रकार के भोजन बनाते हैं।  रक्षाबंधन के दिन सभी आचार्य पड़ित  अपने यजमानों के घर पहुंच कर राखी बांधते हैं।  और उसके बदले धन वस्त्र तथा भोजन प्राप्त करते हैं। 

रक्षासूत्र बांधते समय निम्न मन्त्र का  उच्चारण इस प्रकार 

येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
 तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

रक्षाबंधन ऐतिहासिक कहानी

                            भारतीय इतिहास में भी राखी के उज्ज्वल उदाहरण हैं। मेवाड़ की रानी कर्मवती ने राखी से ही हुमायूं का आवाहन किया था और उसकी सहायता से बहादुरशाह के अत्याचारों से मुक्ति पाई थी। रुपनगर की राजकुमारी रूपवती ने भी राखी के द्वारा ही जयसिंह का आवाहन किया था। पौराणिक काल से आज तक रक्षाबंधन श्रद्धा विश्वास और प्रेम का पर्व मनाया जाता रहा हैं।

रक्षाबंधन हिंदुओं का एक सांस्कृतिक त्यौहार हैं। रक्षाबंधन के त्यौहार का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन इस पवित्र दिन बहनें अपने प्रिय भाइयों के हाथों में राखी बांधकर उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। उनमें प्रेम और सहानुभूति अब भी विद्यमान है। इस पूर्ण पर्व का प्राचीन गौरव अब भी इस रूप से सुरक्षित है। वर्तमान में रक्षा बंधन विशुद्ध रूप से भाई-बहन के प्रेम का त्यौहार बन गया है। रक्षाबंधन का सूत्र पवित्र प्रेम का साक्षी होता है। भाई बहन के आशीर्वाद से स्वयं को धन्य मानता है, जब की बहन भाई की सहायता की अपेक्षा करती है। बदलते समय में भी इस पर्व ने समाज को एक सूत्र में बांधने का काम किया है। रक्षाबंधन  धूम-धाम से मनाया जाता है।